जीवन की सन्ध्या में
अनमना सा यादों को सहेज कर
अनजान दिशा में जा रहा था
एकाएक एक पल की संगति
हीरक सी शोभति नदी से हुई
न जाने क्यों सदी भर की
स्मृति बन गईं है
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