मेरे जीने का तरीका ही बेबाकी है औरएकदम अलग हे
आपके उसुल और सलीके मेरे उसुलों से मेल खाते नहीं हैं।
बुझी है कभी क्या जिह्वा का स्वाद नये नये उसुलों से
कमबख्त छाले भी पड़ते हैं पैरों में उसुलों के वजह से भी
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